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पथरी की समसà¥à¤¯à¤¾ को जड़ से मिटाठ'पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ का पौधा' जानिठइसके औषधीय गà¥à¤£
पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का पौधा होता है। आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इसमें कई औषधीय गà¥à¤£ होते हैं और ये किड़नी में पथरी की समसà¥à¤¯à¤¾ को खतà¥à¤® करने में बेहद कारगर होता है। ये पौधा खाने में खटà¥à¤Ÿà¤¾, नमकीन और सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ होता है, इसलिठइसका उपयोग व सेवन कई पà¥à¤°à¤•ार से किया जा सकता है, जैसे आप चाहे तो इसकी सबà¥à¤œà¥€ à¤à¥€ बना सकते हैं।
1 पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ के दो पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का तोड़कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पानी से अचà¥à¤›à¥€ तरह से साफ कर लें। फिर सà¥à¤¬à¤¹-सà¥à¤¬à¤¹ खाली पेट गरम पानी के साथ इनका सेवन करें। à¤à¤¸à¤¾ नियमित करने पर पथरी की समसà¥à¤¯à¤¾ से राहत मिलती है।
2 पतà¥à¤¥à¤°à¤šà¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ के रस में सौंठका चूरà¥à¤£ मिलाकर सेवन करने से पेट में होने वाले दरà¥à¤¦ से राहत मिलती है।
3 अगर पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ में पथरी हो, तो अजवायन के 10 पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ और पथरचटा के 10 पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को पीसकर पेसà¥à¤Ÿ बना लें। फिर इसमें à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š गोखरू (यह आपको आसानी से बाजार में मिल जाà¤à¤—ा) को मिलाकर सà¥à¤¬à¤¹-सà¥à¤¬à¤¹ खाली पेट लें। à¤à¤¸à¤¾ लगातार तीन दिनों तक करें। हालांकि इसके सेवन के बाद दसà¥à¤¤ और उलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ लग सकती हैं लेकिन चिंता न करें। दिन में तीन बार पथरचटà¥à¤Ÿà¤¾ के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का à¤à¥€ सेवन कर सकते हैं।
4 à¤à¤• गिलास पानी में पथरचटा के 10 पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े का रोज सà¥à¤¬à¤¹ खाली पेट सेवन करें। à¤à¤¸à¤¾ नियमित 5 दिनों तक करने से मूतà¥à¤° संबंधी सà¤à¥€ रोगों से राहत मिलेगी।
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